छोटे से शहर के एक खूबसूरत बगीचे में, जहाँ गुलाब की खुशबू और चहचहाते पक्षी हर दिल को मोह लेते थे, वहीं अनन्या हर सुबह किताब पढ़ने आती थी। वो अकेली रहती थी, लेकिन उसकी आँखों में एक अलग सी चमक थी।
एक दिन, राघव उसी बगीचे में अपने कैमरे के साथ फोटोग्राफी करने आया। उसकी निगाहें अनन्या पर जाकर टिक गईं। खुले बाल, हल्की गुलाबी साड़ी, और किताबों में खोई हुई अनन्या किसी कहानी की परी जैसी लग रही थी।
राघव ने हिम्मत करके उससे बात करने की कोशिश की। "आपकी किताबों में जो दुनिया है, वो इस दुनिया से अलग लगती है," उसने मुस्कुराते हुए कहा।
अनन्या ने नज़र उठाकर उसकी ओर देखा और हल्की मुस्कान के साथ जवाब दिया, "कभी-कभी कहानियाँ हमें सच्चाई से दूर ले जाती हैं, लेकिन उनकी अपनी एक मिठास होती है।"
उस दिन के बाद, उनकी मुलाकातें बढ़ने लगीं। अनन्या किताबों की बातें करती और राघव अपनी फोटोग्राफी के किस्से। दोनों की रुचियाँ अलग थीं, लेकिन उनके दिलों में एक जुड़ाव था।
एक दिन, राघव ने अनन्या को गुलाब दिया और अपनी भावनाएँ जाहिर कीं। अनन्या ने कुछ पल चुप रहकर कहा, "राघव, तुम्हारे साथ वक्त बिताना खूबसूरत है, लेकिन मेरी ज़िंदगी में कुछ अधूरे किस्से हैं जिन्हें मैं पूरा नहीं कर सकती।"
राघव ने उसकी आँखों में झाँकते हुए कहा, "जो अधूरा है, उसे मिलकर पूरा कर लेंगे। बस तुम्हारा साथ चाहिए।"
अनन्या ने उसकी बात पर हौले से सिर हिलाया, लेकिन उसकी आँखों में आँसू थे। वो जानती थी कि वो राघव को अपना पूरा दिल नहीं दे सकती।
कुछ दिनों बाद, अनन्या बगीचे में नहीं आई। राघव ने उसे हर जगह ढूँढा, लेकिन वो कहीं नहीं मिली। उसकी किताब, जो बगीचे में छूट गई थी, उसमें एक पन्ने पर लिखा था:
"राघव, तुमने मुझे जीने की एक नई वजह दी। लेकिन मेरे अधूरे सपने और बीती ज़िंदगी मुझे तुम्हारे लायक नहीं रहने देते। अगर किस्मत चाहती, तो शायद हमारी कहानी पूरी होती।"
राघव ने उस किताब को अपने दिल के करीब रखा और हर दिन उसी बगीचे में जाता रहा। वो जानता था कि उनकी मोहब्बत अधूरी थी, लेकिन वो अधूरापन भी उसकी ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन गया।
समाप्त।
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