मासूम सा पहला प्यार
दसवीं कक्षा का आखिरी साल था। नई किताबें, नए शिक्षक, और साथ में नई उम्मीदें। नीलेश, जो हमेशा अपनी पढ़ाई में खोया रहता था, उस साल अपनी क्लास में नई आई छात्रा, प्रिया, से मिला। प्रिया की मुस्कान ने नीलेश का ध्यान खींच लिया।
प्रिया बहुत ही होशियार और खुशमिजाज लड़की थी। उसकी हर बात में एक अलग सी मासूमियत झलकती थी। पहले तो नीलेश ने कभी उससे बात करने की हिम्मत नहीं की, लेकिन उसकी मुस्कान उसे हर दिन और ज्यादा आकर्षित करती गई।
एक दिन क्लास टेस्ट के दौरान, प्रिया का पेन खराब हो गया। उसने नीलेश से पेन मांगा। नीलेश ने बिना कुछ कहे अपना पेन दे दिया। उस छोटे से पल में नीलेश को लगा जैसे समय रुक गया हो। टेस्ट खत्म होने के बाद प्रिया ने मुस्कुराते हुए पेन लौटाया और "थैंक यू" कहा।
उस दिन के बाद से दोनों के बीच बातें शुरू हो गईं। कभी ग्रुप स्टडी के बहाने, तो कभी स्कूल प्रोजेक्ट्स के दौरान, दोनों करीब आने लगे। नीलेश को प्रिया के साथ बिताया हर पल खास लगने लगा।
एक दिन स्कूल की वार्षिक खेल प्रतियोगिता थी। नीलेश ने दौड़ में भाग लिया और पहला स्थान जीता। पुरस्कार वितरण के समय, प्रिया ने ताली बजाते हुए उसे बधाई दी। उस पल, नीलेश ने अपनी भावनाएं शब्दों में पिरोने की ठानी।
स्कूल की छुट्टी के बाद, नीलेश ने प्रिया को स्कूल गार्डन में बुलाया। कांपते हाथों और धड़कते दिल के साथ उसने कहा, "प्रिया, मुझे नहीं पता ये क्या है, पर जब भी तुम पास होती हो, सबकुछ अच्छा लगने लगता है। शायद ये प्यार है।"
प्रिया थोड़ी देर चुप रही और फिर मुस्कुराते हुए बोली, "मुझे भी ऐसा ही लगता है, नीलेश।"
दोनों ने उस दिन एक-दूसरे को अपना पहला प्यार कबूल किया। उनका प्यार मासूम था, बिना किसी स्वार्थ के। स्कूल के आखिरी दिनों में दोनों ने साथ में ढेर सारी यादें बनाईं, जो उन्हें जिंदगी भर याद रहेंगी।
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