स्त्री चाहती है


एक स्त्री चाहती है 
उसे मिले एक अच्छा जीवन 
उसके सुकून के जल में कोई ना फेंके कंकर

एक स्त्री चाहती है 
जब वह काम से लौटे 
कोई बना दे कम शक्कर वाली चाय 
उसके देर से लौटने पर शक की जगह जताए चिंता
पहले से तैयार रख दे बाल्टी-भर गुनगुना पानी और एक साफ तौलिया

एक स्त्री चाहती है 
उसे मिले एक गर्म हथेली और प्रेमिल स्पर्श
पीठ पर सुकून की थपकी
तमाम आपा-धापी के बाद बचा रहे जीवन में नमक

एक स्त्री चाहती है 
उसे मिले बराबर का हक़ 
उसकी योग्यता को उसकी सुंदरता से तोला न जाए
उसकी योग्यता को मिले पूरी इज्ज़त और सम्मान 

एक स्त्री चाहती है 
घर की जिम्मेदारियों को बांट लिया जाए आधा-आधा
उसके होने , नहीं होने पर 
घर, घर बना रहे 

एक स्त्री चाहती है 
किसी मंच पर चढ़ते हुए नहीं काॅंपे उसके पाॅंव
उसकी साड़ी के पल्लू से ज्यादा ध्यान हो उसके कहे शब्दों पर 
अपना वक्तव्य देते हुए ना हो उसे ट्रोल की चिंता

एक स्त्री चाहती है 
तुम चाहो उसे इतना कि उसकी चाहत की उम्र दोगुनी हो जाए
प्रेम से पहले प्रेम के बाद भी तुम उससे उतना ही रखो नेह

एक स्त्री चाहती है 
तुम रखो उसकी भावनाओं का पूरा ख्याल
उसे दो सांस लेने भर की जगह 

एक स्त्री चाहती है 
उसे स्त्री से ज़्यादा समझा जाए एक मनुष्य।

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