सर्दियों की एक रात थी। बाहर कोहरा छाया हुआ था, और कमरे में अंश अकेला बैठा था। उसके हाथ में मोबाइल था, लेकिन स्क्रीन पर चमकता नाम उसे और गहरे सन्नाटे में ले जा रहा था - "तृषा"। उसने कई बार खुद को रोका कि कॉल न करे, लेकिन दिल की हर धड़कन उसे वही नाम पुकार रही थी। वो नाम, जो अब अंश की ज़िंदगी में एक दर्द बन चुका था।
कुछ महीनों पहले तक, तृषा अंश की ज़िंदगी का सबसे खूबसूरत हिस्सा थी। दोनों की बातें कभी खत्म नहीं होती थीं। तृषा की मुस्कान अंश के लिए किसी जादू से कम नहीं थी। वो घंटों एक-दूसरे से बातें करते, कभी अपनी ज़िंदगी के सपनों के बारे में, तो कभी उन छोटी-छोटी बातों के बारे में, जो सिर्फ उनके दिल से जुड़ी थीं।
जब दूरी ने दस्तक दी
लेकिन फिर, धीरे-धीरे सब बदलने लगा। तृषा ने अचानक से अंश से दूरी बनानी शुरू कर दी। अब वो कॉल्स कम हो गई थीं, मैसेज का जवाब देर से आता था, और तृषा के चेहरे की वो चमक, वो बातों की गर्मजोशी, सब जैसे गायब हो चुकी थी।
अंश परेशान था। उसने हर मुमकिन कोशिश की कि तृषा से बात करे, उससे पूछे कि क्या हुआ है, लेकिन तृषा हर बार कोई बहाना बना देती। अंश का दिल टूट रहा था, लेकिन वो फिर भी तृषा की खुशी के लिए खुद को संभालने की कोशिश करता रहा।
एक दिन तृषा ने बिना कुछ कहे अंश से पूरी तरह से बात करना बंद कर दिया। कोई अलविदा नहीं, कोई वजह नहीं। अंश बस वहीं खड़ा रह गया, अपने अनगिनत सवालों के साथ।
अंश की ख्वाहिश
समय बीता, और अंश ने धीरे-धीरे खुद को संभाल लिया। लेकिन उसके दिल में एक ख्वाहिश थी, एक उम्मीद, कि तृषा कभी न कभी उसे याद करेगी। वो चाह रहा था कि तृषा उसे कॉल करे, उसे तलाशे, और उस दर्द को महसूस करे, जो उसने झेला था।
वो दिन
कई महीनों बाद, एक रात तृषा का दिल अचानक से बेचैन हो उठा। उसे अंश की याद आई। वो सोचने लगी, "काफी दिन हो गए उससे बात किए। पता नहीं वो कैसा होगा।" उसने अपना फोन उठाया और अंश को कॉल किया।
कॉल बजती रही, लेकिन उधर से कोई जवाब नहीं आया। तृषा ने फिर कोशिश की, लेकिन अंश ने फिर भी कॉल रिसीव नहीं की।
अब तृषा के दिल में हल्की बेचैनी होने लगी। उसने अंश को मैसेज किया, "अंश, सब ठीक है न?" लेकिन वो मैसेज डिलीवर हुआ, पर कोई जवाब नहीं आया।
तृषा परेशान हो गई। उसने खुद को समझाने की कोशिश की, "शायद वो बिज़ी होगा।" लेकिन अंश का इस तरह जवाब न देना, उसे अंदर से डराने लगा।
यादों का तूफान
उस रात तृषा ने अपनी गैलरी खोली। वहां अंश की तस्वीरें थीं। वो तस्वीरें, जो कभी उसने अंश के साथ की गई अनगिनत बातों और पलों को कैद करने के लिए खींची थीं। तृषा की आंखों से आंसू बहने लगे।
उसे वो हर पल याद आने लगा, जो उसने अंश के साथ बिताया था। अंश की मुस्कान, उसकी बातें, और वो तरीका, जिससे वो हर बार तृषा को खास महसूस कराता था।
तृषा को एहसास हुआ कि उसने अंश को कितना दर्द दिया था। उसने सोचा, "क्यों मैंने उससे दूरी बनाई? उसने तो हमेशा मेरा साथ दिया। मैंने उसे छोड़कर क्या पाया?"
बेचैनी की गहराई
अगली रात तृषा ने फिर अंश को कॉल किया। इस बार उसकी आवाज़ में हल्की घबराहट थी। लेकिन कॉल का फिर कोई जवाब नहीं आया। उसने फिर मैसेज किया, "प्लीज, अंश। मुझसे बात करो। मैं माफी मांगना चाहती हूं।"
लेकिन अंश का दिल अब पत्थर बन चुका था। उसने वो मैसेज पढ़ा, और फिर उसे डिलीट कर दिया।
तृषा ने अंश को सोशल मीडिया पर ढूंढने की कोशिश की। उसने फेसबुक और इंस्टाग्राम पर मैसेज किए। लेकिन हर बार उसकी कोशिश नाकाम रही।
दूसरी तरफ
अंश अपने कमरे में बैठा था। तृषा के हर मैसेज और कॉल को देखता, और फिर खुद को संभालता। उसके दिल में अब भी तृषा के लिए प्यार था, लेकिन उस प्यार ने अब उसे टूटने से बचने के लिए एक दीवार खड़ी कर दी थी।
उसने खुद से कहा, "शायद अब तृषा को समझ आया होगा कि मैं कितना टूटा था। लेकिन अब मैं पीछे नहीं जा सकता।"
अधूरी मोहब्बत
तृषा के दिल में अंश की यादें अब एक साये की तरह बस गई थीं। वो हर जगह अंश को ढूंढती रही, हर उस पल को फिर से जीने की कोशिश करती रही, जो उसने अंश के साथ बिताया था।
लेकिन अंश अब कहीं नहीं था। उसने तृषा से दूर जाने का फैसला कर लिया था, क्योंकि उसने खुद को उस दर्द से बाहर निकाल लिया था।
तृषा के दिल में एक खलिश रह गई - "काश, मैंने अंश को समझा होता। काश, मैंने उसे जाने न दिया होता।"
और अंश? वो हर रात तृषा की यादों के साथ सोने की कोशिश करता, लेकिन उसके दिल में अब सिर्फ एक बात थी - "कुछ रिश्ते अधूरे ही रह जाते हैं, क्योंकि शायद उनकी यही कहानी होती है।"
प्यार हमेशा खूबसूरत होता है, लेकिन जब ये अधूरा रह जाता है, तब उसकी गहराई समझ आती है।

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