तारों के बीच मोहब्बत की रोशनी


शाम का समय था। सूरज अपनी लालिमा बिखेरते हुए पहाड़ियों के पीछे छुपने को तैयार था। सृष्टि, एक सपनों में खोई हुई लड़की, गाँव के तालाब के पास बैठकर अपनी डायरी में कुछ लिख रही थी। उसका चेहरा हल्की गुलाबी रंगत लिए हुए था और उसकी आँखों में अनगिनत सपने तैर रहे थे।

दूसरी ओर, आरव, शहर का लड़का, अपने दादाजी के गाँव पहली बार आया था। तेज़ और चमकती ज़िंदगी से दूर, ये शांत गाँव उसके लिए किसी दूसरी दुनिया जैसा था। वो अपने कैमरे के साथ गाँव के खूबसूरत दृश्यों को कैद करने निकला।

तालाब के पास पहुँचते ही उसकी नज़र सृष्टि पर पड़ी। उसकी डायरी के पन्ने हवा में उड़ रहे थे। आरव ने आगे बढ़कर पन्ने पकड़ने में उसकी मदद की। जब सृष्टि ने पन्ने लेने के लिए हाथ बढ़ाया, उनकी उंगलियाँ आपस में छू गईं। सृष्टि ने झेंपकर सर झुका लिया, और आरव ने हल्की सी मुस्कान दी।

“शायद ये तुम्हारी कहानियाँ हैं?” आरव ने पन्नों की ओर इशारा करते हुए पूछा।
सृष्टि ने धीरे से सिर हिलाया।
“क्या मैं पढ़ सकता हूँ?” उसने हिम्मत करके पूछा।
सृष्टि थोड़ी देर तक सोचती रही, फिर सहमति में सिर हिलाया।

जैसे-जैसे आरव ने कहानियाँ पढ़ीं, वो सृष्टि की कल्पनाओं और भावनाओं में खोता गया। उसकी कहानियाँ गाँव की सरलता, प्रकृति की खूबसूरती और सच्चे प्रेम की बातें करती थीं।

आने वाले दिनों में दोनों की मुलाकातें बढ़ने लगीं। कभी खेतों के बीच टहलते हुए, कभी गाँव की पतली गलियों में। आरव ने सृष्टि को बताया कि वो फोटोग्राफी का शौक़ीन है, और वो उसकी हर कहानी को तस्वीरों में कैद करना चाहता है।

धीरे-धीरे, उनकी दोस्ती एक गहरे रिश्ते में बदल गई। आरव ने सृष्टि के सपनों को अपने कैमरे में उतारा, और सृष्टि ने उसकी हर तस्वीर को अपनी कहानियों से सजाया।

लेकिन एक दिन, आरव ने बताया कि उसकी वापसी का समय आ गया है। सृष्टि का दिल टूटने जैसा महसूस हुआ, लेकिन उसने अपनी भावनाओं को छुपा लिया।

विदा के दिन, आरव ने सृष्टि को एक छोटा सा गिफ्ट दिया – एक डायरी, जिसमें उसने उनकी मुलाकातों की तस्वीरें चिपकाई थीं। साथ ही उसने आखिरी पन्ने पर लिखा था,
“ये तस्वीरें मेरे लिए सिर्फ यादें नहीं, बल्कि तुम्हारे सपनों की कहानी हैं। मैं इन्हें हर दिन पढ़ना चाहता हूँ। क्या तुम मेरी ज़िंदगी की कहानी बनोगी?”

सृष्टि की आँखें भर आईं। उसने आरव को देखकर मुस्कुराते हुए कहा, “हाँ, लेकिन मेरी शर्त है कि हर तस्वीर के पीछे एक नई कहानी तुम्हें लिखनी होगी।”

आरव हंस पड़ा और बोला, “डील पक्की।”

और इस तरह, दो अलग-अलग दुनिया के लोग, एक दूसरे की कहानियों और तस्वीरों में हमेशा के लिए बंध गए।

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